छत्तीसगढ़
उच्च शिक्षा विभाग ने दो प्राचार्यों समेत 9 सहायक प्राध्यापकों को किया निलंबित
Shantanu Roy
12 Jan 2026 8:51 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा संस्थानों में शासकीय खरीदी नियमों का उल्लंघन उजागर होने के बाद शासन ने त्वरित और कठोर कार्रवाई करते हुए दो प्राचार्यों समेत नौ सहायक प्राध्यापकों को निलंबित कर दिया है। पहली कार्रवाई नारायणपुर जिले में हुई, जहां महिला महाविद्यालय के प्राचार्य और चार सहायक प्राध्यापकों को निलंबित किया गया। वहीं, दूसरी बड़ी कार्रवाई महासमुंद जिले में हुई, जहां एक प्राचार्य समेत चार सहायक प्राध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
बिना निविदा बड़ी खरीदी का मामला
उच्च शिक्षा विभाग में प्राप्त शिकायतों के अनुसार, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने 15 अप्रैल 2025 को एक ही दिन में लगभग 1 करोड़ रुपये के 26 क्रय आदेश बिना निविदा प्रक्रिया के जारी किए। इसी तरह शासकीय बोरणा सनातन संस्कृत आदर्श महाविद्यालय, नारायणपुर ने 14 अक्टूबर 2025 को 35 लाख रुपये के 22 क्रय आदेश और शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट महासमुंद ने 22 अक्टूबर 2025 को 1 करोड़ रुपये मूल्य के 36 क्रय आदेश बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए जारी किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने 28 नवंबर 2025 को अपर संचालक की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया। समिति की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्राचार्यों और सहायक प्राध्यापकों को निलंबित किया गया।
नारायणपुर महिला महाविद्यालय में निलंबन
नारायणपुर महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. योगेंद्र पटेल और सहायक प्राध्यापक भूषण जय गोयल, किशोर कुमार कोठारी, हरीश चंद बैद एवं नोहर राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। यह कार्यवाही पी.एम. उषा मद से आबंटित राशि के दुरुपयोग और शासन के निर्धारित वित्तीय नियमों के पालन में अनियमितताओं के कारण की गई। निलंबन आदेश के अनुसार सभी संबंधित अधिकारी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत निलंबित होंगे। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक, कार्यालय जगदलपुर निर्धारित किया गया है। इस दौरान जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता उन्हें दी जाएगी।
महासमुंद में कार्रवाई
महासमुंद जिले में शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट के प्राचार्य और चार सहायक प्राध्यापकों को निलंबित किया गया। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में शासकीय खरीदी नियमों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रभाव और प्रशासनिक दृष्टिकोण
उच्च शिक्षा विभाग का यह कदम राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई है। निलंबन की इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट होता है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन त्वरित और कठोर कार्रवाई करेगा। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र विभागीय जांच अलग से की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक वैधानिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित ऑडिट और निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
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